बनेगा पहला विद्युत रेल इंजन

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मधेपुरा :- आगामी 11 अक्तूबर को मधेपुरा में ग्रीन फील्ड विद्युत रेल इंजन कारखाना में पहला विद्युत रेल इंजन बनना प्रारंभ होगा. समारोह पूर्वक इस उपलब्धि को सेलीब्रेट किया जायेगा.

2018 के आठ फरवरी को विद्युत रेल इंजन कारखाना को राष्ट्र को समर्पित करने का प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति के लिए भेजा गया है. मधेपुरा के डीएम मो सोहैल ने यह जानकारी दी कि महज 12 महीने में कारखाना निर्माण का कार्य पूर्ण हो रहा है. कारखाना बनाने के लिए निधारित समय वर्ष 2018 का मार्च तय किया गया था. लेकिन कार्य ने ऐसी रफ्तार पकड़ी की निर्धारित समय से छह माह पूर्व ही कारखाना पूर्ण होने के कगार पर है. मधेपुरा ग्रीनफील्ड विद्युत रेल कारखाना का पहला इलेक्ट्रिक इंजन इस साल ही तैयार होगा.
खुशी की बात यह कि पहला इंजन मधेपुरा रेल कारखाना में ही बनेगा.
रेलवे बोर्ड के एडिशनल सदस्य इलेक्ट्रिकल वीके अग्रवाल की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई बैठक में इस साल से फ्रांस स्थित एलस्टॉम कंपनी से सेमी एसेम्बल विद्युत इंजन पार्ट्स लाने का निर्णय लिया गया है. एसेम्बल कर मधेपुरा कारखाना में एलस्टॉम कंपनी के इंजीनियरों द्वारा इंजन तैयार किया जायेगा. तैयार इंजन का ट्रायल रन लखनऊ यूपी के आरडीएसओ (रेल डिजायन सेफ्टी एंड रिसर्च डेवलपमेंट) में चलाकर किया जायेगा. ट्रायल रन के दौरान लोको जांच, सेफ्टी जांच के अलावा अन्य तरह की जांच की जायेगी.
जुर्माने के बाद आयी कारखाना निर्माण में तेजी  –
मधेपुरा के डीएम मो सोहैल द्वारा कारखाना निर्माण की समीक्षा के दौरान शुरुआती दौर में धीमी प्रगति के लिए भारी भरकम राशि कटौती करने का निर्देश दिया गया. इसके बाद कारखाना निर्माण कर रही कंपनी ने परिसर निर्माण के लिए ठेके पर कार्य कर रही कंपनी टाटा प्रोजैक्ट की राशि कटौती कर ली. वहीं से कारखाना के निर्माण ने गति पकड़ ली. टाटा प्रोजैक्ट द्वारा निर्माण कार्य की गति को युद्ध स्तर पर तेज कर दिया गया. यही कारण है कि कारखाना समय से पूर्व बनकर तैयार हो रहा है.
मधेपुरा में बन रहे वाले विद्युत रेल इंजन कारखाना के निर्माण की जिम्मेदारी फ्रांस की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनी ऑल्सटॉम को दी गयी है. ये  परियोजनाएं पूरी तरीके से एफडीआइ (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) पर आधारित है. यह प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया की अब तक की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है. ऑलस्टम द्वारा कारखाना परिसर  निर्माण कार्य के लिए टाटा प्रोजेक्ट को चयनित किया गया. टाटा प्रोजेक्ट द्वारा पूरी गति से कारखाना निर्माण को गति दी गयी. ऑलस्टम के हेड समेत टाटा एवं रेल के अधिकारी समय समय पर कारखाना का दौरा कर प्रगति की जानकारी लेते रहे.
एक साथ हुआ टेंडर, पर छपरा रह गया पीछे  –
गौरतलब है कि मधेपुरा एवं छपरा में रेल कारखाना के लिए लगभग साथ -साथ एग्रीमेंट हुआ. लेकिन छपरा में कारखाना ने आकार नहीं लिया. यह  भारत का सबसे बड़ा विदेशी निवेश है और इतने कम समय में पूर्ण होने से मधेपुरा की छवि देश एवं दुनिया में बेहतर हुई है. विदेशी कंपनियों का यह विश्वास गहराया है कि बिहार के सुदुरवर्ती जिले में इस तरह करीने से समय पूर्व कार्य पूरा हो सकता है तो फिर इस इलाके को औद्योगिक नगरी में तब्दील होने से कोई नहीं रोक सकता.

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